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अक्सर कार्य करने के दौरान दो लोगों के बीच में कंपटीशन फायदेमंद होता है। इससे ना केवल कार्य क्षमता बढ़ती है बल्कि उत्पादकता भी उसी अनुपात में बढ़ती है। पर बदलते जमाने में कार्य करने वाले दो पति पत्नी हो तो भी क्या यही स्थिति होगी? घर में अगर दोनों लोग वाकिंग तो आदर्श स्थिति क्या होनी चाहिए? इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य सामने रखे जा सकते हैं
जैसे अगर आपका पार्टनर वर्किंग है तो उससे कंपटीशन अंततः नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कंपटीशन नुकसान दे है तो फिर किस प्रकार से सामंजस्य बैठाया जाना चाहिए? बदलती सिचुएशन में हम अपने पार्टनर के साथ टीम वर्क के तौर पर काम कर सकते हैं और ऐसे में उत्पादकता भी बढ़ेगी और उत्पादकता के साथ एक स्वस्थ माहौल भी उत्पन्न होगा।

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अगर घर में कंपटीशन रहेगा तो किड्स से वैलिडेशन लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी जो अंततः तनाव बढ़ाने का कारण बन जाएगी। मतलब मां-बाप आपस में ही प्रतिस्पर्धा करने लग सकते हैं। 1 बेहतर पैरंट्स बनने के दिखावे में इसी तरह से सोसायटी एक्सेप्टेंस को लेकर भी प्रतिद्वंद्विता नुकसानदायक साबित होती है। इन सबसे बढ़कर अगर पति और पत्नी में कंपटीशन होता है तो पैसे को लेकर एक बड़ी समस्या सामने आती है कि कौन अधिक कमाता है यहां से एक सुपीरियरिटी और इंफेरियारिटी कंपलेक्स जन्म लेता है जो रिश्तो को खोखला करने लगता है।

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विभिन्न सेलिब्रिटीज के रिश्तों के ना चल पाने का एक बड़ा उदाहरण माना जा सकता है ऐसी स्थिति अधिकतर मर्दों के साथ पेश आती है अगर पत्नी ज्यादा कमाई करने लग जाए तो भारतीय परिवेश में खासकर स्थिति विचित्र हो जाती है। हालांकि धीरे-धीरे यह ओल्ड फैशन होता जा रहा है और अब लोग इन चीजों में भरोसा करने लगे हैं और एक दूसरे को सहयोगी के रूप में स्वीकार भी करने लगे हैं पर स्थिति अभी पूरी तरह से नहीं बदली है। एक दूसरे से खुद को श्रेष्ठ दिखाना भी वर्किंग कल्चर में वैवाहिक संबंधों के लिए उचित नहीं है अगर कोई एक पार्टनर लगातार दूसरे के ऊपर अपनी श्रेष्ठता साबित कर रहा है तो उसे सावधान हो जाना चाहिए।

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इसी तरह से अगर दूसरा पार्टनर अपनी कमियों पर पार नहीं पा रहा है या पाने की कोशिश नहीं कर रहा है तो उसे भी हालातों को समझते हुए संभव रास्तों को अख्तियार करना चाहिए, ताकि अपलिफ्टमेंट बढ़ सके और लगातार स्कोर बढ़ाते जाना चाहिए। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार दो बैट्समैन पिच पर खेलते हुए एक दूसरे को अधिक से अधिक स्ट्राइक देते हैं और अंततः टीम जीतने की अवस्था में पहुंचती है। जिम्मेदारियों को अगर पति पत्नी ठीक ढंग से निभा पाते हैं और एक दूसरे को समझ पाते हैं एक टीम की तरह तो इस बात में कोई शक नहीं कि तमाम वित्तीय समस्याओं से निपटते हुए वह एक आदर्श और समृद्ध जीवन जी सकते हैं। आखिर वह दोनों एक दूसरे के लिए ही तो हैं और उनकी साझी विरासत उनके बच्चे ही तो हैं जो उनकी लीगेसी को आगे बढ़ाएंगे।

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