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किसी गृहिणी के लिए अगर कोई जिम्मेदारी सबसे बड़ी मानी जाए तो वो बच्चों की देखभाल करना है। उस में भी सबसे ऊपर आएगा खासकर भारतीय परिवेश में तो औरतों का मुख्य कार्य बच्चों को सही दिशा देना ही माना जाता रहा है। हालांकि समय बदला है किंतु जिम्मेदारी बिल्कुल भी नहीं बदली और आज भी एक गृहिणी के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य यही है। जब आपके बच्चे धीरे धीरे बड़े होने लगते हैं तब आपको उनकी देखभाल के लिए विशेष रूप से प्रबंधन करना पड़ता है और ऐसी स्थिति में बच्चों का कमरा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सामान्य तौर पर बात की जाए तो बच्चों के कमरे में प्रकाश और हवा की उचित व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए, क्योंकि बच्चों को नेचर के संपर्क में जितना ज्यादा रखेंगे उतना ही ज्यादा उनका दिमाग विकसित होगा।

बच्चों के कमरे की दूरी

इसी प्रकार से बच्चों पर नजर रखनी भी आवश्यक है और अगर आपके कमरे से बच्चों के कमरे की दूरी काफी ज्यादा है तो इसमें आपको भी और उनको भी असुविधा हो सकती है। अगर आपका बच्चा 10 साल से कम उम्र का है तब तो रात में सोते समय भी उसको आप की जरूरत पड़ सकती है और जब आपका कमरा दूर हो तो ऐसी स्थिति में बच्चे डर जाते हैं जाहिर तौर पर इस प्रकार की सिचुएशन आने से पहले ही इन पर विचार किया जाना चाहिए।

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बच्चों का बेड

अपने बजट को ध्यान में रखकर बच्चे के रूम को सजाने से पहले कुछ बातें हैं हमें अपने दिमाग में रखनी चाहिए जैसे कितने बेड चाहिए अगर आपके दो बच्चे हैं तो उस हिसाब से एक बेड पर वह सोएंगे या फिर दो छोटे-छोटे बेड चाहिए। इसको आप रूम की साइज के हिसाब से डिसाइड कर सकते हैं ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि केवल बेड से बच्चों का पूरा कमरा भर जाए और उन्हें जरा भी चहल कदमी करने का स्पेस ना मिले। दिलचस्प बात यह है कि अगर आपका कमरा छोटा है तो बंक बेड का कॉन्सेप्ट जिस प्रकार से ट्रेनों में एक के ऊपर दूसरी सीट होती है उसका इस्तेमाल किया जा सकता है और कम जगह में भी बेहतर फील दी जा सकती है।

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दीवारों का रंग

इसके बाद दीवारों के रंग और वॉल पेंटिंग पर बात आती है तो इसमें सारे कलर की बजाय चटक रंगों का प्रयोग ज्यादा उचित रहता है जैसे नीला, पीला, गुलाबी इत्यादि बच्चों का कमरा थोड़ा रंगीन होना चाहिए और उसमें बच्चों की पसंद के हिसाब से कुछ कार्टून और स्टीकर लगाए जा सकते हैं। वॉल पेंटिंग के बाद खिलौनों के लिए भी स्पेस बनाना ज्यादा फायदेमंद रहता है और खासकर अगर खिलौनों की एक टोकरी हो जाए तो यह ज्यादा उचित रहेगा क्योंकि बच्चे खिलौनों से खेलते ही हैं और अगर खिलौने रखने का एक नियमित स्थान ना हो तो पूरे कमरे में खिलौने फैले रहने के चांसेस ज्यादा होते हैं। इसीलिए निश्चित रूप से खिलौनों का एक स्पेस बनाएं

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स्टडी टेबल

इसके बाद पढ़ने के लिए टेबल सर्वाधिक आवश्यक है क्योंकि अगर टेबल का इस्तेमाल नहीं करते हैं बच्चे तो बेड पर बैठ कर पढ़ने की उनकी आदत विकसित हो जाती है और बाद में यह आदत छूटती नहीं है और कभी लेट कर कभी उल्टा बैठकर बच्चे पढ़ना स्टार्ट कर देते हैं। इसीलिए खिड़की के पास जहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था अवश्य करें बच्चों के लिए वॉडरोब्स भी होनी चाहिए ताकि वह अपने कपड़े इत्यादि प्रबंधित करना है सीखते रहें और एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में इस तरह के कई उपायों को अपनाकर बच्चों के कमरे को एक बेहतर स्वरूप प्रदान किया जा सकता है।

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